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एक ही तो देश भारत देश है

                
                                                         
                            एक ही तो देश है
                                                                 
                            
जो सारे संसार का ताज है
कल भी था और आज है
और भविष्य में भी रहेगा
सूर्य सा दमकता रहेगा
कोई क्या कहेगा?
हमारा इतिहास कहता है
हमारा कर्म विचार कहता है
है हिमालय कहां
है तीन समंदर कहां
है वेद पुराण कहां
हैं राम श्याम कहां
हैं बलराम कहां
है स्वर्ग धाम कहां
है शिवा चौहान कहां
हैं हनुमान कहां
जग में कि कोई टिक सके सामने हमारे
धन्य धन्य स्वयं इन्द्र राज पुकारें
आकर भीख कर्ण से
वे यहीं मांगे
जग जाने
न जाने
हैं हम महान
हैं हम ज्ञानवान
हैं हम चरित्रवान
आसमान सा उज्जवल हमारा चरित्र है
टांग रहा जग घर-घर में हमारे भारत मां का चित्र है
देश यह विचित्र है
हां,हां,यह विचित्र है
अनेकता में एक है
देश यही तो नेक है
वैसे गिनाने के लिए तो देश अनेक हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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2 घंटे पहले

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