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धर्मों के दुकान में

                
                                                         
                            ईश्वर हैं हमारे अंदर
                                                                 
                            
पर पत्थर
पूज रहे हैं हम
घूम रहे हैं हम
मंदिर मंदिर
मस्जिद मस्जिद
खाली है मंदिर
खाली है मस्जिद
ईश्वर वहां नहीं है
ईश्वर हैं
हमारे ईमान में
खेत खलिहान में
खटते किसान में
बच्चों के मुस्कान में
हम ढूंढ़ रहे हैं आसमान में
हैं वे शुद्ध दिल के मकान में
ढूंढ़ रहे हैं हम जहान में
धर्मों के दुकान में।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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4 दिन पहले

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