धार्मिक शहर गया की है बात बड़ी निराली
सदा से पुष्पित पल्लवित होती आई इसकी डाली
यहां सभी धर्मों का हुआ है आदर
सबको समझते हैं हम अपना बिरादर
हिंदू,मुस्लिम,सिख,ईसाई
बौद्ध,जैन सभी धर्म हैं हमारे भाई
है यह धरा ऐसी पावन
पड़े जहां सबके चरण
मां जानकी,भाई भरत,साथ श्रीराम
सभी आए यहां हमारे गया धाम
युधिष्ठिर,भीम भी यहां आए
आकर सिद्धार्थ भी महा ज्ञान पाए
और गौतम बुद्ध कहलाए
सिंगरा स्थान में श्रृंगी ऋषि
कपिलधारा में कपिल श्रृषि
कश्यप श्रृषि भी यहां आए
गयाजी विष्णुजी का परमधाम जहां होता पिंडदान है
विष्णु पद मंदिर में उनका चरण चिन्ह विराजमान है
देवघाट आकर यहां नानक देव ठहरे यह वही स्थान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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