भारत हमारा ऐसा बन जाए
एक भिखारी कहीं दिख न पाएं
हो सभी आत्म निर्भर
सब खाएं पेंट भर
सबके पास हो घर
सबके पास हो बसन
विकसित हो वतन
भारत विकसित बन जाए
जग भारत का गुण गाए
है यही मेरा सपना
है सपना मेरा अपना
मेरे सपने में है भारत का सपना।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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