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आज का परिवार

                
                                                         
                            उल्टा पुल्टा है हमारा आज परिवार
                                                                 
                            
पुरुष बोलता प्यार से,दिखाता प्यार
औरत चिल्लाती है करती है प्रहार
कभी कठोर वाणी से करती संहार
कभी करती करों से वार, प्रहार
होता है हर दिन तकरार
भूल कर सारे संस्कार
तोड़ती फोड़ती है परिवार
हो रहे हैं सारे संबंध विच्छेद
क्योंकि हो गई सभ्यता में छेद
अब से भी संभलो,सुनो संसार!
करो आत्म सुधार,बनाओ सुंदर संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक महीने पहले

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