पंख
आसमान में उड़ती थी,
गाती थी खिलखिलाती थी।
सफेद नरम पंखों से,
नीले आसमान को छू जाती थी।
बरदाश्त ना हुई मेरी आज़ादी,
काट दिए गए मेरे सफेद पंख।
निराश नहीं हुई, उदास नहीं हुई,
फिर से उड़ना सीख जाऊँगी।
जब फिर आ जाएँगे मेरे सुंदर सफेद पंख,
नीले आसमान में उड़ती चली जाऊँगी।
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