रोशनी की ओर
सुख किसी संयोग का
मिल जाने वाला नाम नहीं,
वह तो मन के दीपक में
हर दिन भरा जाने वाला
विश्वास है।
सुनहरी भोर
आकाश से नहीं उतरती,
वह जन्म लेती है
उन आँखों में,
जो अँधेरे के बाद भी
प्रकाश की प्रतीक्षा करती हैं।
रोज़ कोशिश
केवल मंज़िल पाने की नहीं,
अपने भीतर की
जड़ता, भय और निराशा से
एक कदम आगे बढ़ने की होनी चाहिए।
काँटे यदि राहों में हों,
तो पाँव रुकें नहीं;
बादल यदि घिर आएँ,
तो दृष्टि झुके नहीं।
जीवन का अर्थ
हार-जीत में नहीं,
हर गिरावट के बाद
फिर उठ खड़े होने में है।
जिसने
उम्मीद की लौ बचाए रखी,
उसके लिए
हर रात के गर्भ से
एक नई सुबह जन्म लेती है।
इसलिए—
सुख की नज़रों में
सुनहरी भोर होनी चाहिए,
और हर धड़कन में
एक मौन संकल्प—
रोज़ कोशिश
रोशनी की ओर होनी चाहिए।
- अनिता चतुर्वेदी
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