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मृणाल

                
                                                         
                            मृणाल
                                                                 
                            

तालाब की शांत देह में
कमल तो सबने देखा,
पर किसी ने नहीं पूछा
उसकी जड़ों तक पहुँचने वाले
उस पतले-से मृणाल का हाल।

वह जल के भीतर था,
फिर भी जल में डूबा नहीं था,
कीचड़ के बीच था,
फिर भी कीचड़ उसका परिचय नहीं था।

उसने जाना था—
ऊपर खिलना
सिर्फ़ सुंदर होना नहीं,
नीचे अँधेरे में
अपनी जड़ बचाए रखना भी है।

मैंने उसे देखा
तो लगा—
हम सबके भीतर भी
एक मृणाल होता है,

जो हमें
हमारी जड़ों से बाँधे रखता है,
जबकि दुनिया
बार-बार कहती है—
“ऊपर उठो,
पीछे मुड़कर मत देखो।”

पर मृणाल जानता है—
जड़ों से कटकर
ऊँचाई नहीं मिलती,
सिर्फ़ गिरने की दूरी बढ़ती है।

इसलिए
कमल की तरह खिलना हो
तो पहले
मृणाल की तरह
अपनी जड़ों से जुड़े रहना सीखो।

क्योंकि
फूल दिखाई देता है,
पर उसे जीवित रखने वाला
अक्सर दिखाई नहीं देता।

- अनिता चतुर्वेदी
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2 महीने पहले

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