काश तुम साथ होते~
काश तुम साथ होते,
तो बारिश का मज़ा कुछ और होता।
भीगी पगडंडियों पर चलते हुए
हर कदम में प्रेम का एक नया छोर होता।
गिरती बूंदों का संगीत
मन की वीणा पर झरता रहता,
हवा कोई मधुर गीत गुनगुनाती,
और समय ठहर-ठहर मुस्कुराता रहता।
बादलों की ओट से झाँकती धूप
तेरे चेहरे की आभा बन जाती,
भीगे पेड़ों की हरियाली
आँखों में नई ऋतु रच जाती।
फिर हम दोनों चुप रहते,
पर खामोशी भी बोल रही होती;
बीते दिनों के किस्से
हर बूँद में फिर से खुल रहे होते।
अब तो बरसात आती है,
भीगती है धरती, भीगता है मन भी,
पर तेरे बिना यह सावन
अपनी पूरी रागिनी नहीं कह पाता कभी।
काश तुम साथ होते,
तो यह मौसम केवल बारिश न होता—
यह प्रेम का वह उत्सव होता,
जिसे हर धड़कन जीवन भर गुनगुनाती रहती।
- अनिता चतुर्वेदी
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