यह जो ज़िंदगी है, बड़ी ख़ास है,
कभी ग़म है, तो कभी उदास है।
पर कुछ वक़्त दोस्तों का मिल जाए तो,
यह चालीस की उम्र भी बिंदास है।
नौकरी से दूर कहीं घूमने निकल जाओ,
तो चालीस भी बीस के पास है।
दो पल दोस्तों का साथ मिल जाए तो,
हर रात ख़ुशमिज़ाज है।
यह जो ज़िंदगी है, बड़ी ख़ास है,
हर पल में एक नया एहसास है।
ग़म हो या ख़ुशी, दोस्तों का साथ हो तो,
चालीस की उम्र भी जवानी के पास है।
— अनिल शाह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X