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बस रूह से रिश्ता रखना था

                
                                                         
                            हम दीवाने हैं,दीवाने थे
                                                                 
                            
कुछ दुनिया से अनजाने थे
क्या दाना देकर रोना था
ये पंछी तो उड़ जाने थे
वे सूरज,चांद का करते
दिन रात से जो बेगाने थे
थी एक शमां की चाह नहीं
वे मौत के जो परवाने थे
मस्ती कम थी,इस दुनिया में
हम जन्म से ही मस्ताने थे
क्यों रोक रखा था आंखों में
ये अश्क कभी गिर जाने थे
बस रूह का रिश्ता रखना था
ये जिस्म सभी मर जाने थे
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4 घंटे पहले

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