कहते हैं साथ साथ हैं पर दूर बहुत हैं
रहबर ये काफिले के बे शऊर बहुत हैं
कई बार हार गए हम जीती हुई बाजी
किस्से कई तारीख में मशहूर बहुत हैं
दिवानों की मुश्किल वही पुरानी कहानी
जो चेहरे के हसीन हैं मगरूर बहुत हैं
माना है कुछ दिनों से अमन चैन शहर में
तबीयत खराब करने को नासूर बहुत हैं
मिलते रहे पैगाम हमें भी हर रकीब के
अपना जमीर है कि हम मजबूर बहुत हैं
दिल यूं तो मुसाफ़िर था फूलों की राह का
तकदीर में अपने मगर बारूद बहुत हैं
है बढ़ने का इरादा और इल्म भी हमें
फिसलन हमारी राहों में भरपूर बहुत हैं
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