उसके हुकूमत का कभी शोर हुआ करता था
उसकी शोहरत का कोई दौर हुआ करता था
आज जिस तरह है नहीं था हरगिज़ पहले
पहले हर आदमी कुछ और हुआ करता था
आज अब उसकी मिन्नतें नहीं सुनी जाती
जिसकी तुतलाहटों पर गौर हुआ करता था
दफ़्न है उसकी अब मिट्टी जमीन के नीचे
दुनिया में जिसका बहुत खौफ हुआ करता था
हमसे इंसाफ की उम्मीद वो भी रखता था
हर समय जिसके दिल में चोर हुआ करता था
कमी वतन पे मरने वालों की कभी न हुई
तू अकेला क्या सरफरोश हुआ करता था
वक़्त जाने का भी एहसास नहीं है मुझको
तू नहीं था तो बहुत बोर हुआ करता था
सिर्फ सहरा के खौफनाक नजारे हैं बचे
जिस जगह जलवा ए फिरदौस हुआ करता था
कुछ पढ़ाया था गया हमें किताबों में मगर
वो हकीक़त में तो कुछ और हुआ करता था
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