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जिनसे मोहब्बत कर न सका मैं

                
                                                         
                            खुद से नफरत कर न सका मैं
                                                                 
                            
पर दुनिया का हो न सका मैं
इतने बुरे भी लोग नहीं थे
जिनसे मोहब्बत कर न सका मैं
सब कुछ पाकर,भी हूं अधूरा
कुछ तो हासिल कर न सका मैं
तेरी कमी या मेरी कमी थी
साथ जो तेरे चल न सका मैं
बहलाया,फुसलाया गया पर
अपनी जिद ना छोड़ सका मैं
करने को थी सख्त पाबंदी
केवल सुन कर रह न सका मैं
अफ़साने कुछ और हकीक़त
ऐसी गली से गुजर न सका मैं
पाए धोखे, पीठ में खंजर
कोशिश कर भी डर न सका मैं
तुमसे कुछ भी कह न सका मैं
और कहीं चुप रह न सका मैं
ख्वाबों में जीना भी धोखा था
कोई ग़ज़ल फिर कह न सका मैं
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2 महीने पहले

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