ये बारिशों का मौसम अजीब होता है
जो भीग जाए वही खुशनसीब होता है
अमीर है वही जो है तुम्हारी सोहबत में
जो तुमसे दूर है बेशक गरीब होता है
मुझे रकीब से हमदर्दी हुई जाती है
वही हर वज़्म में मेरे करीब होता है
तुम्हारे साथ की तलब है खिलाफत तुमसे
कोई मुझसा भी कहां बदनसीब होता है
हजारों जख्मों का कुछ भी असर नहीं होता
नहीं दुखता है जब दिल में हबीब होता है
ये ताज कांटों का भी मुश्किलों से मिलता है
किसी फ़रिश्ते को हासिल सलीब होता है
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