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बुरा ख्वाब

                
                                                         
                            कदम बहके तो बेतरह बहके
                                                                 
                            
फूल रुसवाइयों के भी महके
हमें उस राह पर जाना नहीं था
हमें मालूम था चलने से पहले
तजुर्बे आने को आए हैं लेकिन
वही बातें रहे अक्सर ही सुनते
हमें मालूम थी सारी हकीकत
लगा रखें थे तुमने लाख परदे
गिरे थे मुद्दतों से भूल जाओ
चले हम देख लो उठके सम्हलके
जरा सी आँच की ख्वाहिश थी मेरी
बचा दामन हमारा जलते जलते
हमें जो ख्वाब आया था बुरा था
खुली जब नींद तो आया समझ में
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3 महीने पहले

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