मोहब्बत का हर कोई दीवाना था
आपको तो बच के निकल जाना था
ऐसे वाकयात रह रह के याद आते हैं
जिनको हमें पहले ही भूल जाना था
तुम जिस गली के अभी दीवाने हो हुए
वहां कभी अपना भी आना जाना था
नींद में अब अक्सर ये ख्वाब आता है
मेरे रुख पे तेरे आँचल का शामियाना था
तुमको भी शायद इस जाम की जरूरत थी
और नाकाम मोहब्बत तो बस बहाना था
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