शीर्षक: जय नीलांचल जय जगन्नाथ
जय जगन्नाथ, जय नीलांचल जय जगन्नाथ
भाई बलभद्र बहन सुभद्रा के साथ जय जगन्नाथ
सबसे अनूठा व पावन धाम है पुरी का जय जगन्नाथ
बड़ी ही अनोखी है यहाँ की परंपराएं
बड़ी धूमधाम से निकलती है यहाँ की रथ यात्रा
बड़ी ही तैयारी के साथ निकलती है यहाँ की रथ यात्रा
तीन रथों मे सवार होते है तीनों देव
काष्ठ से बिना लोहे के प्रयोग के तैयार होते हैं ये अनूठे रथ
यहाँ भगवान बीमार भी पड़ते हैं
पुरी के मन्दिर की ध्वजा भी है बड़ी निराली
इसे उल्टा चढ़कर बदला जाता है
यह हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है
मन्दिर के ऊपर से कोई पक्षी या
जहाज का ना उड़ना भी बड़ा ही अद्भुत है
जय जगन्नाथ, जय नीलांचल जय जगन्नाथ
नौ दिनों के लिए तीनों देव भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और भगवान् जगन्नाथ जाते हैं अपनी मौसी गुंडिचा मन्दिर
भगवान् के प्रसाद की महिमा भी बड़ी निराली है
मिट्टी के बर्तनो मे बनाया जाता है भगवान् का महाप्रसाद
सबसे उपर वाले बर्तन में सबसे पहले प्रसाद पकता है
शुद्ध सात्विक होता है ये महाप्रसाद
क्या क्या वर्णन करें अनंत महिमा है नीलांचल जगन्नाथ
जय जगन्नाथ, जय नीलांचल जय जगन्नाथ
-अनंत कुमार माथुर ’ अनंत ’
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