ख्वाब तुम बिन अधूरे हुए हैं मेरे
ज़ख्म तुम बिन मंजर हुए हैं मेरे
ये अधूरी मोहब्बत की लड़ाई में
सपने तुम बिन अधूरे हुए है मेरे
दिल की चौखट पे नाम है तेरा मगर
संवर तुम बिन न पाए ख्वाब देखे अधूरे हुए है मेरे
जिक्र तुम भी न कर पाए दर्द ए मोहब्बत का
आंसू तुम बिन बहे हैं जो भीगकर दर्द गहरे अधूरे हुए हैं मेरे
कोई तन्हाई में यूं भला क्या करे
देवता तुम बिन न बन पाए फूल अक्सर चढ़े अधूरे हुए हैं मेरे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X