रोशनी और अँधेरे की इस अनंत जंग में
"जीत हमेशा रोशनी की ही होती है…"
हाँ, यह बात और है कि
कभी-कभी अँधेरा बहुत घना होता है,
बहुत गहरा होता है,
और कभी इतना लंबा
कि इंसान को लगने लगता है
"शायद अब सुबह कभी नहीं आएगी…"
लेकिन याद रखना
"अँधेरा चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो,
वह कभी हमेशा के लिए नहीं होता।"
एक दिन क्षितिज पर
उम्मीद की पहली किरण जन्म लेती है,
और धीरे-धीरे
रात की सारी स्याही
सूरज की एक मुस्कान के आगे
हार जाती है।
ज़िंदगी में सुख का सूरज भी
शायद कुछ पल के लिए ही आता है…
लेकिन वे कुछ पल
पूरी उम्र पर भारी पड़ जाते हैं।
क्योंकि सुख के वे छोटे-छोटे क्षण
सिर्फ़ समय नहीं होते
वे यादें बनकर धड़कनों में बस जाते हैं,
रोशनी बनकर आत्मा में उतर जाते हैं,
और उम्मीद बनकर जीवन भर साथ चलते हैं।
कभी कोई मुस्कान,
कभी किसी अपने का स्पर्श,
कभी किसी अधूरे सपने का पूरा होना,
कभी बिना कहे किसी का समझ जाना
ये पल भले ही क्षणिक हों,
मगर इनकी चमक उम्र भर रहती है।
इसलिए अगर आज ज़िंदगी में अँधेरा है,
तो घबराना मत…
"रात कितनी भी लंबी हो,
सुबह का आना तय है।
दर्द कितना भी गहरा हो,
सुकून का एक पल उसका अर्थ बदल सकता है।
और उम्मीद की एक छोटी-सी किरण भी
पूरी ज़िंदगी को फिर से रोशन कर सकती है।"
बस अपने भीतर की रोशनी को
बुझने मत देना…
क्योंकि
"अँधेरा रास्ता रोक सकता है,
लेकिन मंज़िल छीन नहीं सकता।"
और याद रखना
"ज़िंदगी में रोशनी के कुछ पल ही काफी होते हैं,
पूरी उम्र को रोशन करने के लिए…"
-आचार्य अमित
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