"प्यार को प्यार..."
प्यार तो सभी करते हैं,
और दावे भी सभी करते हैं,
हमसे न प्यार ही हुआ,
न झूठा कोई दावा किया गया।
शायद यही वजह रही
कि हम जैसा आदमी,
भीड़ के बीच रहकर भी
उम्र भर तनहा ही रहा।
कुछ उबाल ऐसे हैं
जो बेवक्त दिल में उठ आते हैं,
कुछ दर्द ऐसे हैं
जो लफ़्ज़ों में उतरने से पहले ही
आँखों में ठहर जाते हैं।
मगर हमसे सब्र का रिश्ता
कुछ यूँ गहरा रहा,
मानो उजालों पर भी
सदा अँधेरों का पहरा रहा।
उनकी हर बात को निभाने में
हमने ख़ुद को मिटा देने की
पुरज़ोर कोशिश की,
उनकी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूँढी,
उनके दर्द को अपना समझा,
और अपनी हर साँस तक
उनके नाम करने की कोशिश की।
फिर भी जाने क्यों,
उनका दिल
सिर्फ़ हमसे ही बेज़ार रहा।
हम कहते रहे
“तुम कहो तो तुम्हारी हर बात निभा लेंगे,
तुम जहाँ कहोगे, वहीं अपना संसार बना लेंगे।”
मगर वो फिर भी
किसी ऐसे शख़्स की तलाश में रहे
जो उनके साथ चल सके,
और हम…
उनके साथ चलकर भी
उनकी मंज़िल न बन सके।
शायद यही वजह रही—
कि वो बहुतों के होकर भी
किसी के न हो सके,
और एक हम हैं—
जिसका अपना कोई नहीं,
फिर भी जाने क्यों
हम हर किसी के
तहे-दिल से हो गए।
शायद मोहब्बत का हासिल
पाना नहीं होता,
कभी-कभी किसी को
बिना पाए भी
पूरी शिद्दत से चाह लेना होता है।
कभी किसी की याद में
चुप रह जाना भी इबादत है,
कभी किसी की ख़ुशी के लिए
अपने हिस्से का दर्द
मुस्कुराकर सह लेना भी मोहब्बत है।
ऐ ख़ुदाया…
सब पर अपना करम बरसाना,
उन पर भी
जिनका तू ख़ुद नाख़ुदा है,
और हम पर भी
जिन्होंने तेरा नाम लेकर
हर तूफ़ान को सहना सीखा है।
हम शिकायत लेकर नहीं आए,
बस शुक्रगुज़ार हैं तेरे
कि तूने हमें
मोहब्बत करना सिखाया,
बिना हिसाब, बिना शर्त,
बिना किसी हासिल की उम्मीद के।
"शुक्रगुज़ार हूँ तेरा
और सदा रहूँगा…"
तूने प्यार को
प्यार की तरह समझा दिया,
मोहब्बत को
इबादत की तरह सजा दिया।
ऐसा लगा मानो
फूलों में ख़ुशबू ने
अपना रंग भर दिया हो,
और एक टूटे हुए दिल ने भी
तेरे करम से
जीने का हुनर सीख लिया हो।
क्योंकि अंततः
जो प्रेम हमें मिला नहीं,
शायद वही प्रेम
हमें भीतर से पूरा कर गया।
और जो अपना होकर भी
अपना न हो सका,
वही हमें यह सिखा गया
"मोहब्बत किसी को
हासिल करने का नाम नहीं,
मोहब्बत तो ख़ुद को किसी के लिए
बेहतर इंसान बना देने का नाम है।"
- अमित
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