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अनकही और अनसुनी

                
                                                         
                            अनकही और अनसुनी
                                                                 
                            

कुछ कहे बिना ही
जाने क्या तुमने सुन लिया,
मेरी खामोशी के अर्थ तो समझ लिए,
पर मेरे शब्दों का इंतज़ार न किया।

काश! तुमने मेरा कहा भी
सुन लिया होता,
तो शायद रिश्तों की राह में
इतनी दूरियाँ न बोता।

अनुमान अक्सर अधूरे होते हैं,
सच तो संवाद में खिलता है।
जो दिल से कहा जाए,
वही विश्वास का दीप जलाता है।

जीवन हमें यही सिखाता है—
सिर्फ़ सुनना ही पर्याप्त नहीं,
समझना भी उतना ही आवश्यक है।
क्योंकि कई बार एक सच्ची बात,
हज़ार गलतफ़हमियों से बड़ा परिवर्तन ला देती है।

आइए, सुनने से आगे बढ़कर
समझने का प्रयास करें।
क्योंकि अनकहे भाव प्रेरणा दे सकते हैं,
लेकिन कहे हुए शब्द
जीवन बदलने की शक्ति रखते हैं।
-आचार्य अमित
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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