बाहर जाने वाले अगर आते नहीं,
फिर धड़कन का राग हम बजाते नहीं।
बुझी हुई उम्मीदों को अगर जगाते नहीं,
फिर साँसों के सफ़र को आगे बढ़ाते नहीं।
धड़कनों के बहाने गर अपना हाल बताते नहीं,
जिंदा हैं या नहीं, फिर नब्ज़ों से आजमाते नहीं।
जिंदा हैं, अगर जिंदा नज़र आते नहीं,
गर गम के इस अंबार में मुस्कुराते नहीं।
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