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सच का परचम

                
                                                         
                            सच का परचम
                                                                 
                            

ये चंद लोग जो सच का परचम लिए फिरते हैं,
झूठ को सच बताने पे उतर आएँ तो क्या होगा?

जो लोग चराग़ से ख़ुद रोशनी लेकर,
उसी को बुझाने पे उतर आएँ तो क्या होगा?

जो हमें एक अल्फ़ाज़ भी सिखा दे,
वो एहतराम के क़ाबिल है।
हम उसी का मयार गिराने पे उतर आएँ तो क्या होगा?

बग़ावतें करके जंग जीती जाती हैं,
बग़ावत करके किसी की इज़्ज़त को धूल में मिलाने पे उतर आएँ तो क्या होगा?

ये चंद लोग जो सच का परचम लिए फिरते हैं,
इनके किरदार बताने पे उतर आएँ तो क्या होगा?

ये सियासत, ये बातें करते हुए कैसे लगते हो?
अगर हम तुम्हारा ज़मीर तुमको दिखाने पे उतर आएँ तो क्या होगा?
 
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7 घंटे पहले

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