चलते रहो दोस्तों,
वरना मंज़िल तक रास्ता न जाएगा।
अभी तो कोई मुश्किल भी नहीं आई है,
अभी देखना, वो भी पड़ेगा
जो हमसे देखा न जाएगा।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X