सलाखें लगाओ, पहरे बिठाओ, बाँधो जंजीरें,
पर हवाओं का चलना कैसे रोकोगे?
मौसम का बदलना कैसे रोकोगे?
छुपाओगे सच, भर दोगे फ़िज़ा में नफ़रत, पर
नफ़रत का मोहब्बत में बदलना कैसे रोकोगे?
हवाओं का चलना कैसे रोकोगे?
मौसम का बदलना कैसे रोकोगे?
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