आखीर में रह जाती है एक राख की ढेली
लोग यह कहते हैं कि जीवन है पहेली
आदमी भी तोड़ दिया करता तभी दम
साथ छोड़ जाती जब भी साँस सहेली
एक एक करके सभी साथ छोड़ते
रहती जो जेहन में है उनकी याद अकेली
छोड़ कर महक को इस जहान में
मुरझा गया एक दिन लो फूल चमेली
खेल जिंदगी का लगे खत्म हो गया
खुली की खुली रह गईं ये दोनों हथेली
अंत कह रहा है कोई इसको शुरुआत
आलोक मिलन को चली दुलहिन हो नवेली
-आलोक
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