संरक्षित पिनाक जनक पास,
लौह संदूक लगे पहिये आठ।
भारी भरकम था अति पिनाक,
उसे खींचते सदा बली आठ।।
जनक दुलारी एक दिवस,
जा पहुँची पिनाक पास।
खेल खेल में उसको खींचा,
भारी बक्सा बन्द पिनाक।।
पिनाक हटा दिया दुलारी ने,
खबर फैल गईं सिगरी नगरी।
राजा जनक ने जाकर देखा,
थी सत्य खबर सिगरी नगरी।।
राजा जनक अब थे गद गद,
सीता बेटी है मेरी बलशाली।
पिनाक हटा दिया अकेले ही,
जिसे हटाते आठ बलशाली।।
पिनाक उठाये कर से,
अरु तीर करे संधान।
ताहि वरण करे दुलारी,
ऐसी मेरी प्रतिज्ञा जान।।
-अशर्फी लाल मिश्र
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