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श्रावण की मादकता

                
                                                         
                            घिर आए हैं घटाटोप काले,
                                                                 
                            
रिमझिम फुहारों से सजे दिलवाले।
दही-सी जमी आसमां पे उदासी,
उठी मस्त पुरवैया ठंडी हवा सी।

डालियों पर झूले पड़े मनभावन,
मस्ती में झूम उठा सारा ये पावन।
पपीहे की बोली से गूँजे तराना,
आया देखो सावन का मौसम सुहाना।

बिजली की चमक और बादलों की गर्जन,
पुलकित हुआ सारा माटी का कण-कण।
सूखे थे जो रास्ते, हरियाली छाई,
ऋतुओं की रानी ने है अलख जगाया।

‘अनपढ़’ ये पल न कभी लौट आएंगे,
इन यादों को हम दिल में बसाएंगे।
बरसात का हर बूँद लाए नया बहाना,
आया है देखो सावन का मौसम सुहाना।
— अखिलेश जोशी ‘अनपढ़’
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4 दिन पहले

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