हम इश्क़ में रहते है
हर कोई किरदार में रहते है
बच्चे कहां हाथ में रहते है
मधुशालाएं सारी बेहोश हो जाती है
जब हम इश्क़ में रहते हैं
समंदर उफ़ान में रहते है
किनारे परेशान रहते है
हम खराब से खराब हो जाते है
जब हम इश्क़ में रहते हैं
बचपन उदास रहते है
खिलौने भी साथ रहते है
नहीं कोई यारी निभाने वाला
जब हम इश्क़ में रहते हैं
दुःख सारे वीरान रहते है
चित तो हैरान रहते है
डर जात हु अपने स्वप्न से
जब हम इश्क़ में रहते हैं
- ऐ. के. गौतम
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