ना जाने किसकी नज़र का शिकार हो गया हूँ मैं,
कि खुद से ही अब बेगाना सा रहता हूँ।
तुझे भूल पाना मेरे बस में कहाँ,
बस मैं तो तेरी यादों के चिराग दिल में जलाए रखता हूँ।
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