मौन है कविता, मौन हैं शब्द,
फिर भी भाव सुनाई देते हैं।
होंठ भले कुछ कह न पाएँ,
नयन सभी बतलाते हैं।
मौन में छिपी है एक कहानी,
मौन में छिपा संसार है।
जो शब्दों से कह न सके मन,
मौन वही अभिव्यक्ति अपार है।
कभी मौन है पीड़ा गहरी,
कभी शांति का मधुर एहसास।
कभी अकेलेपन की छाया,
कभी किसी अपने की आस।
शब्द थक जाएँ जब कहकर,
मौन उन्हें सहलाता है।
टूटा हुआ मन भी अक्सर
मौन में मुस्कुराता है।
मौन को केवल चुप्पी मत समझो,
यह भावों की भाषा है।
जिसने मौन को पढ़ना सीखा,
उसने मन को जाना है।
- के कनौजिया
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