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आखिर हम भारत के बच्चे ये अपनी महतारी।

                
                                                         
                            हम हिन्दू हों या मुस्लिम हों या हों सिख ईसाई।
                                                                 
                            
हम सब के सब मुफ्तुल्ले आपस में भाई भाई।
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मुफ्तुल्लो मुफ्तुल्लों के हित मुफ्तुल तन्त्र बनाओ
कृणवंतो विश्वं मुफ्तुल्ला मुफ्तुलवाद चलाओ।
बच्चे बूढ़े नौजवान नर किन्नर लोग लुगाई।
हम सब के सब मुफ्तुल्ले आपस में भाई भाई। १
-
संसद में लहराये अपना मुफ्तुल्लों का झंडा।
मुफ्तुल्लों से पंगा ले जो दे चुनाव में अंडा।
पंजा फूल साईकिल हाथी सबके सगे जमाई।
हम सब के सब मुफ्तुल्ले आपस में भाई भाई। २
-
हमको साधै बिना न सत्ता यहाँ कोई भी पाता।
सारे संसदीय गदहों के हम ही भाग्य विधाता।
हम कुर्सी के बाप चाहे उस के संग करें सगाई।
हम सब के सब मुफ्तुल्ले आपस में भाई भाई। ३

आखिर हम भारत के बच्चे ये अपनी महतारी।
तो फिर खाना और पखाना क्यों न हो सरकारी।
मिले चकाचक राशन पानी दारू और दवाई ।
हम सब के सब मुफ्तुल्ले आपस में भाई भाई। ४
-अच्युतम केशवम
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16 घंटे पहले

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