रोज़ रोज देखा मत कर,
रोज़ देखा मत करो आईना,
सरमा जाएगा।
ऐसे ही तैयार हो जाया करो,
लोगों का मक़बरा अख़बारों में आ जाएगा।
कल तक जो प्यारे ख़ूब थे,
उन्हें कैसे पहचानूं!
हल्के-फुल्के हवा में,
शायद हृदय का मन जागे।
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