नाथ कर कृपा हम पर, मैं महिदेव पुत्र हूँ,
आपके रिपु (शत्रु) का मैं अर्जून हूँ।
कृपा करो नाथ हम पर, भक्त की भक्ति देखो,
न क्रोध की भावना आप में, न शत्रुता की आँखें।
विलोक कर कृपा करो नाथ,नाथ!
सरल निष्ठा से अपना भक्त मानो।
नाथ! आप दोनों भाई दे दो मुझको शरण,
नाथ कहते-कहते कब मिलेगी शरण?
विभीषण कहते हैं, नाथ शरण तो—विष्णु के साथ हो।
जहाँ भाई लक्ष्मण सा,
भक्त हनुमान सा,
तीनों देव एक साथ देते दर्शन हैं।
किसी जन्म में न छोड़ूँ,
भक्ति भाव का रस आपकी,
नाथ! करूँ वंदन.......।
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