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खामोश समंदर के आँसू

                
                                                         
                            मीठी बातें,
                                                                 
                            
थोड़ा सा प्यार,
और डाँट का जो अधिकार दिया,
उस डाँट में भी है प्रेम छिपा,
जिसने मुझको स्वीकार किया।
यदि रूठो तुम या डाँटो तुम,
तो क्षमा याचना कैसी है?
अपनों की डाँट तो अमृत है,
यह प्रीत पुरानी जैसी है।
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एक महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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