मीठी बातें,
थोड़ा सा प्यार,
और डाँट का जो अधिकार दिया,
उस डाँट में भी है प्रेम छिपा,
जिसने मुझको स्वीकार किया।
यदि रूठो तुम या डाँटो तुम,
तो क्षमा याचना कैसी है?
अपनों की डाँट तो अमृत है,
यह प्रीत पुरानी जैसी है।
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