चाय,
टपरी का नहीं,
ना घर का,
इश्क की चाय चाहिए।
इंतजार की घड़ी में,
किसी बात के अन-बन में
किसी और बात के लिए,
एक चाय जरूरी है।
थकान की डोलियां में,
प्रशंसा की खुशी में,
चाय,
चाय।
किसी के हक़ पर,
याद,
बेवफ़ाई में,
इश्क की चाय चाहिए।
वर्षा के मधुर भंडार मे,
बादल के याद में,
चहल पहल पर,
इश्क की चाय चाहिए।
अखबार के सामने,
मोहब्बत के नाम ,
इश्क की चाय चाहिए,
चाय।
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