आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आलोचना और सेवा

                
                                                         
                            आसान है करना आलोचना
                                                                 
                            
अपनी ही नहीं,

खतरा है आलोचना करना
खुद पर नहीं,

कुछ वक्त दूसरों के लिए,
अपना तय नहींअमेज़ॅन की घाटी है ।

कोई हम सहयोगी नहीं विरोध कर रही संसार यहाँ,
कोई जीवन सम्भव नहीं।

कोई जीवन का सम्भव रखने को,
भगवान अकेले नहीं साथ-साथ पात-पात भगवान का सहयोगी डॉक्टर ही ।

सही जन्म-मृत्यु सब सही ,
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर