मेरे ख्वाबों में उसके प्यार की ख़ुशबू आए
मैं फूल कोई सूँघूँ तो उस की महक आए
उसके खयालों में फिर हम उलझते गए
अचानक लगा कि हम पत्थर से इंसान बन गए
फ़लक पर पौ फटने के जब आसार नज़र आए
तो लगा कि दो सुनहरे बाज़ू मेरी ओर आए
वक़्ते सहर कुछ यादें कुछ वादे याद आए
दुआ पढ़ी कि ये ख़्वाब भी हक़ीक़त बन जाए
-अभय ‘अवधी’
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