तब तक ही शादाब रहा
जब तक उसमें आब रहा
काटा जीवन गुरबत में
आदत का नायाब रहा
साधन थोड़े कम कम थे
पर आँखों में ख्वाब रहा
संघर्ष भरा कुल जीवन
गुरबत में गरकाब रहा
लम्बी दूरी तय की यूँ
थोड़ा ही असबाब रहा
-हमीद कानपुरी
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