जब रिमझिम बरसाना लगता
मंजर ख़ूब सुहाना लगता
आज सियासी लीडर क्यूँकर
नफ़रत का परवाना लगता
करुण कथा भी दर्दों ग़म की
जगकोइक अफसाना लगता
आग लगाने वाला घर को
कुछ जाना पहचाना लगता
रफ्ता रफ्ता प्रीत बढ़ी जब
आज नहीं अनजाना लगता
काम ग़लतसेमिलतायशकब
भारी सा जुर्माना लगता
आँखें नीची करना जग को
अक्सर ही शरमाना लगता
-हमीद कानपुरी
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