आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इंतज़ार की एक नज़र

                
                                                         
                            कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
                                                                 
                            
किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे।

कभी तो नाम हमारा भी किसी लब पर आए,
कभी तो दिल में हमारे लिए भी प्यार दिखे।

हमेशा हम ही क्यों तलाशें किसी की निगाहों को,
कभी तो कोई हमें ढूँढता हुआ बेकरार दिखे।

कभी तो भीड़ में ठहर जाए कोई पल भर को,
कभी तो उसकी नज़र में हमारा ख़ुमार दिखे।

हमने तो चुपके से चाहा है उसे उम्र भर,
कभी तो उसकी ख़ामोशी में भी इकरार दिखे।

कभी तो वो भी पूछे हाल-ए-दिल हमारा,
कभी तो उसके सवालों में अपना सरोकार दिखे।

हम रोज़ गुजरते हैं उसकी राहों से यूँ ही,
कभी तो राह में उसका भी इंतज़ार दिखे।

बहुत छुपा रखे हैं जज़्बात दिल की तह में,
कभी तो उसकी नज़रों में भी कोई राज़दार दिखे।

हमने तो हर दुआ में बस उसी को माँगा है,
कभी तो उसकी दुआओं में भी हमारा नाम दिखे।

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे...

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर