कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे।
कभी तो नाम हमारा भी किसी लब पर आए,
कभी तो दिल में हमारे लिए भी प्यार दिखे।
हमेशा हम ही क्यों तलाशें किसी की निगाहों को,
कभी तो कोई हमें ढूँढता हुआ बेकरार दिखे।
कभी तो भीड़ में ठहर जाए कोई पल भर को,
कभी तो उसकी नज़र में हमारा ख़ुमार दिखे।
हमने तो चुपके से चाहा है उसे उम्र भर,
कभी तो उसकी ख़ामोशी में भी इकरार दिखे।
कभी तो वो भी पूछे हाल-ए-दिल हमारा,
कभी तो उसके सवालों में अपना सरोकार दिखे।
हम रोज़ गुजरते हैं उसकी राहों से यूँ ही,
कभी तो राह में उसका भी इंतज़ार दिखे।
बहुत छुपा रखे हैं जज़्बात दिल की तह में,
कभी तो उसकी नज़रों में भी कोई राज़दार दिखे।
हमने तो हर दुआ में बस उसी को माँगा है,
कभी तो उसकी दुआओं में भी हमारा नाम दिखे।
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे...
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