अपनी औकात पर उतर आए है
अब मेरे दोस्त भी मेरे सामने ही
मेरी जात पर उतर आए है
मैं उन्हें अपना ही मानता था फिर भी
वो अपनी बात उतर आएं है
मुझे दोस्ती के सिवा कोई रिश्ता नहीं आता
मैं उसको निभाता हूं मुझे दगा करना नहीं आता
फिर भी वो मेरे जज़्बात पर उतर आए है
सब मेरी जात पर उतर आये हैं।
दिया था वक्त जो उसको गवारा समझा
मेरे हर एक काम के साथ मुझे नक्कारा समझा
शायद उन्हें मुझसे ज्यादा गैरों की बातों पर भरोसा है
मेरी बातों को तराजू में तौलने का मिला मौका है
तौल डाला मेरा विश्वास और अपने वादों को
नहीं कर पाएं है अब भी गलत साबित मुझको
चलती है मेरी दोस्ती लंबे अरसे तक
मुझे मालूम है फ़िर से आयेंगे मेरे दोस्त मेरे घर तक
मेरी दोस्ती इतनी कमजोर नहीं होती
दूसरों की बातों के आगे ढेर नहीं होती
लगता है अब भ्रम से जाग कर आए है
अब मेरे दोस्त अपनी औकात पर उतर आए है
मेरे सामने ही मेरी जात पर उतर आए है ।।
-आकाश कुमार
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