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मै वैसी लड़की बनना चाहती हूँ

                
                                                         
                            मैं वैसी लड़की बनना चाहती हूँ
                                                                 
                            

जो हर दिन स्वयं को थोड़ा और सँवारती है,
जो दूसरों से ज़्यादा अपने सपनों को समझती है,
जो बिना शोर किए चुपचाप परिश्रम करती रहती है,
और प्रतिदिन खुद को अपने कल से आगे पाती है
हाँ, मैं वैसी लड़की बनना चाहती हूँ।

जो छोटी-सी सफलता में भी मन से खुशी ढूँढ लेती है,
जो अपनी भूलों को बोझ नहीं, सीख मानकर आगे बढ़ती है,
जो दुनिया की बातों से अपने रास्ते नहीं बदलती,
बस अपने ही गति से अपनी दुनिया में आगे बढ़ती रहती है
हाँ, मैं वैसी लड़की बनना चाहती हूँ।

जो लड़कों के चक्कर में अपना लक्ष्य नहीं भटकाती,
जो दिल से अधिक दिमाग से निर्णय लेना जानती है,
जो कम बोलकर भी अपने सिद्धांत ऊँचे रखती है,
और अपनी गरिमा को कभी किसी के आगे झुकने नहीं देती
हाँ, मैं वैसी लड़की बनना चाहती हूँ।

जो किसी को प्रभावित करने नहीं, स्वयं को सुधारने निकली हो,
जो हर परिस्थिति में अपनी मर्यादा साथ लेकर चलती हो,
जो लोगों को शब्दों से नहीं, अपनी शख़्सियत से याद रह जाए,
और जिसे देखकर दूसरी लड़कियाँ भी प्रेरणा पाएँ
हाँ, मैं वैसी लड़की बनना चाहती हूँ।

:- एकता भानु
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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