ऐसे ही किसी क्षण उड़ते हुए भूतपूर्व फूल आये
और कहने लगे हम तितलियां हैं
तब से बाग-बगीचे ढूंढ़ रहा हूं
आत्मा में तितलियों की एक पूरी पाठशाला लिये हुए
एक ओर से आती है मेरी पांच वर्ष की बेटी
दूसरी ओर से चेचक से मरी हुई मां
बीच में एक लकीर सी बनती आती है
मेरी अधयुवा पत्नी
बचपन की कोई झलक लिये हुए
नक़्शे के मुताबिक बसाये हुए एक बाग में
...जिनमें अनेक वे स्त्रियां भी हैं
ऐसे ही किसी क्षण आती है सुरंग तितलियां
जिनमें अनेक वे स्त्रियां भी हैं
जो मरी हुई छपीं अख़बार में
वे भी चली आती हैं कांपती-थरथराती
वे अभी ठीक से स्त्रियां नहीं हईं थीं
और उमड़ आती हैं वे भी
जो कल के समाचारों में होंगी अचेत
...और न उनकी कोई ससुराल होती है
तितलियों के ब्याह नहीं होते
न उनकी कोई ससुराल होती है
मगर तितलियों की बहुत होती हैं तितलियां
जो मैं ढूंढ़ पाता हूं अपने से बाहर एक बाग़
उनको बसाने के लिए
उसमें ही रोज़ कुछ को मरी हुई पाता हूं
क्या मायके ही होते हैं तितलियों के घर
क्या मायके ही होते हैं तितलियों के घर
पेड़ों कोटरों और गुफ़ाओ में
बाग़ीचों में नहीं होते उनके घर
बाग़ीचा तो वे खुद होती हैं
और अपने अलावा दूसरा बाग़ीचा
उनका समरांगण होता है
जहां योद्धा नहीं नि:शष्त्र फूल उन्हें भरमाते हैं
क्या हत्या के लिए ही हैं ये सब्ज़बाग़ ?
तितलियां कंघा नहीं करतीं
न बाज़ार करती हैं
उनकी कोई कुंडली नहीं होती
न वे फांसी लगाती हैं न स्टोव जलाती हैं
वे सिर्फ आत्माएं हैं
ऐसी कि जो खुद अपना डोला लिए हुए चलती हैं
खुशबुओं के रेले में एक तितली
खुशबुओं के रेले में एक तितली
ढूंढ़ती है दूसरी तितली को
अपने शरीर में पैदा हुई लकीर के सहारे
तितली एक उड़ती हुई धरती है
सारी कक्षा में कुछ संकेत कुछ संकेत कुछ रंग
कुछ पराग कण घूम रहे हैं
हवा के बुलबुलों को तितली बना देने के लिए
चाहे फूलों पर काम की जरूरत हो चाहे कांटों पर
चाहे फूलों पर काम की जरूरत हो चाहे कांटों पर
चाहे कोटरों में नींद ले चाहे बिस्तर पर
बाग़ीचे को हमेशा ज़रूरत रहेगी ऐसे शरीर की
जिसमें तितली की आत्मा हो
निरक्षर हवा में अपने सुख-दुख उकेरने वाली
तितली का आत्मा।
साभार: अनुभव के आकाश में चांद (राजकमल प्रकाशन)
आगे पढ़ें
...जिनमें अनेक वे स्त्रियां भी हैं
कमेंट
कमेंट X