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तितलियों के ब्याह नहीं होते : लीलाधर जगूड़ी 

कविता
                
                                                         
                            ऐसे ही किसी क्षण उड़ते हुए भूतपूर्व फूल आये 
                                                                 
                            
और कहने लगे हम तितलियां हैं 
तब से बाग-बगीचे ढूंढ़ रहा हूं 
आत्मा में तितलियों की एक पूरी पाठशाला लिये हुए

एक ओर से आती है मेरी पांच वर्ष की बेटी 
दूसरी ओर से चेचक से मरी हुई मां 
बीच में एक लकीर सी बनती आती है 
मेरी अधयुवा पत्नी 
बचपन की कोई झलक लिये हुए 
नक़्शे के मुताबिक बसाये हुए एक बाग में  आगे पढ़ें

...जिनमें अनेक वे स्त्रियां भी हैं 

4 वर्ष पहले

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