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पराजित नायक की दिनचर्या और उसकी सीख

दल-बदलू
                
                                                         
                            मिलने से बचता हूँ
                                                                 
                            
सामने पड़ने पर कतराकर निकल जाता हूँ

मन नहीं करता किसी से बात करने का 
किसी की बातें सुनने का

लड़ने-झगड़ने का तो बिलकुल ही नहीं
हाँ भाई, आप ही ठीक हैं
अब यहाँ से विदा लें
या मैं ही चला जाता हूँ

बच्चे अच्छे लगते हैं
एकान्त अच्छा लगता है

चिड़िया ने घास-फूस-तिनको से 
अपना घोंसला तैयार किया है
उनसे उमगते शिशुओं की चिन्ता रहती है
कहीं गिर न जाएँ

पूरा चन्द्रमा 
काली रातों में चमकते तारे
जल से उठते सूरज की बिखरी लालिमा अच्छी है

जो भी मिल जाए खा लेता हूँ
पहन लेता हूँ
चुप रहता हूँ
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एक वर्ष पहले

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