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अमित दुबे: इंजीनियर से साइबर जासूस... फिर लेखक और अब OTT की दुनिया का नया चेहरा

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                            1300 से अधिक साइबर अपराध सुलझाने वाले अमित दुबे की असली केस डायरी से निकलीं देश की चर्चित वेब सीरीज
                                                                 
                            

किसी साइबर अपराध की जांच पूरी होने के बाद आमतौर पर एक केस फाइल बंद हो जाती है। उसमें दर्ज होती हैं डिजिटल सबूतों की कहानी, अपराधियों की चालाकियां और पुलिस की मेहनत। लेकिन कुछ केस ऐसे भी होते हैं जो फाइलों तक सीमित नहीं रहते। वे किताब बनते हैं, फिर करोड़ों लोगों तक पहुंचने वाली वेब सीरीज का हिस्सा बन जाते हैं।
ऐसी ही एक अनोखी कहानी है अमित दुबे की। एक ऐसा नाम, जिसने अपनी जिंदगी में कई किरदार निभाए—इंजीनियर, साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेटर, पुलिस ट्रेनर, लेखक, रेडियो शो होस्ट और अब OTT की दुनिया में चर्चित पटकथा लेखक। शायद यही वजह है कि आज उनकी पहचान सिर्फ एक साइबर एक्सपर्ट की नहीं, बल्कि ऐसे लेखक की भी बन चुकी है, जो असली अपराधों को रोमांचक कहानियों में बदलने का हुनर रखते हैं।

IIT से शुरू हुआ सफर, लेकिन मंजिल कुछ और थी
आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमित दुबे भी बाकी इंजीनियरों की तरह तकनीक की दुनिया में अपना करियर बना सकते थे। लेकिन उन्होंने एक अलग रास्ता चुना। उन्हें महसूस हुआ कि इंटरनेट और नई तकनीक सिर्फ सुविधाएं नहीं दे रही, बल्कि अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल रही है। यहीं से उनकी दिलचस्पी साइबर अपराधों की जांच में बढ़ी। धीरे-धीरे वे देश की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जुड़ते गए और पिछले दो दशकों में 1300 से अधिक साइबर अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नौ लाख से ज्यादा पुलिसकर्मियों को दिया प्रशिक्षण
अमित दुबे का एक बड़ा योगदान प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी रहा है। देशभर की पुलिस अकादमियों, न्यायिक अकादमियों और विभिन्न सरकारी संस्थानों में वे लगातार साइबर अपराध जांच, डिजिटल साक्ष्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देते रहे हैं। अब तक 9 लाख से अधिक पुलिस अधिकारियों, जांच अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को वे प्रशिक्षित कर चुके हैं। लेकिन इतने वर्षों तक अपराधियों की मानसिकता को समझने के बाद उनके मन में एक सवाल लगातार उठता रहा।

क्या सिर्फ अपराधियों को पकड़ लेना ही काफी है?
अगर आम लोग साइबर अपराधों के तरीके समझ ही नहीं पाएंगे, तो वे बार-बार ठगी का शिकार होते रहेंगे। यहीं से शुरू हुआ उनका दूसरा सफर। जब जांच अधिकारी बना लेखक अमित दुबे ने अपने अनुभवों को किताबों में लिखना शुरू किया। एक-एक कर उन्होंने 9 किताबें लिखीं, जिनमें साइबर अपराधों की वास्तविक घटनाओं को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इन किताबों ने लोगों को यह समझाया कि साइबर अपराध सिर्फ तकनीक की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी लालच, भरोसे और भावनाओं की भी कहानी है।
धीरे-धीरे उनके लेखन की चर्चा फिल्म और वेब सीरीज की दुनिया तक पहुंची।

असली केस से बनीं OTT की कहानियां
बहुत कम लोग जानते हैं कि Amazon Prime Video की चर्चित वेब सीरीज "Hack Crimes Online" की प्रेरणा अमित दुबे की वास्तविक जांचों से मिली। इसके बाद उन्होंने Special Ops 2 में भी रचनात्मक योगदान दिया। अब उनकी नई वेब सीरीज "प्रीतम पेड्रो" (JioHotstar) चर्चा में है, जिसे देश के जाने-माने फिल्मकार राजकुमार हिरानी के साथ मिलकर तैयार किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस कहानी को अंतिम रूप देने में छह साल लगे। 16 बार लिखी गई पूरी स्क्रिप्ट अमित दुबे बताते हैं कि प्रीतम पेड्रो की स्क्रिप्ट एक-दो बार नहीं, बल्कि 16 बार पूरी तरह लिखी गई। कई बार ऐसा लगा कि कहानी तैयार हो गई है, लेकिन फिर उसे दोबारा लिखा गया। उनके अनुसार, राजकुमार हिरानी हर कहानी में अपना अलग रंग भरते हैं। वे सिर्फ रोमांच नहीं चाहते, बल्कि चाहते हैं कि दर्शक हंसें भी, भावुक भी हों और थिएटर या स्क्रीन से कुछ सीखकर भी जाएं। यही वजह है कि प्रीतम पेड्रो सिर्फ साइबर अपराध की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों, भरोसे और इंसानी भावनाओं की भी कहानी बन गई। नीरज पांडे और राजकुमार हिरानी... दो अलग स्कूल अमित दुबे कहते हैं कि देश के दो बड़े फिल्मकारों के साथ काम करना उनके लिए अपने आप में एक सीख रही। उनके मुताबिक नीरज पांडे थ्रिलर के मास्टर हैं। वे कहानी में ऐसा रोमांच पैदा करते हैं कि दर्शक अंत तक स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाते। वहीं राजकुमार हिरानी का तरीका बिल्कुल अलग है। वे हर कहानी में इंसानियत, हास्य और एक सामाजिक संदेश जोड़ देते हैं। अमित मानते हैं कि कॉमेडी, थ्रिल और साइबर अपराध को एक साथ जोड़ना आसान नहीं था, लेकिन हिरानी की सोच ने इसे संभव बनाया।

रेडियो से लेकर किताबों तक... हर मंच पर साइबर जागरूकता
अमित दुबे सिर्फ लेखक या जांच अधिकारी ही नहीं हैं। वे वर्षों तक रेडियो कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते रहे हैं। उनका मानना है कि अगर लोग साइबर अपराध के तरीकों को समय रहते समझ जाएं, तो हजारों अपराध होने से पहले ही रोके जा सकते हैं। शायद यही कारण है कि वे सेमिनारों, किताबों, रेडियो कार्यक्रमों और अब वेब सीरीज—हर माध्यम का इस्तेमाल लोगों को जागरूक करने के लिए कर रहे हैं।

एक नई पहचान
आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक, डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है, तब अमित दुबे की कहानियां सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि लोगों को सतर्क भी बनाती हैं। वे उन चुनिंदा लोगों में हैं जिन्होंने पुलिस की केस डायरी, अदालतों की फाइलों और साइबर अपराध की वास्तविक घटनाओं को लाखों दर्शकों तक पहुंचाने का नया रास्ता बनाया है। एक इंजीनियर से साइबर अपराध अन्वेषक, फिर लेखक, रेडियो प्रस्तोता और अब OTT की दुनिया में चर्चित पटकथा लेखक बनने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि अगर अनुभव को कहानी का रूप दिया जाए, तो वह समाज को जागरूक भी कर सकता है और मनोरंजन भी। शायद इसलिए अमित दुबे की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ अपराध सुलझाना नहीं है, बल्कि उन अपराधों की सच्ची कहानियों को इस तरह कहना है कि देश का हर व्यक्ति उनसे कुछ सीख सके।
एक महीने पहले

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