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झारखंड: त्योहारों पर पटाखे चलाने के लिए नए नियम जारी, समय-सीमा तय, दिवाली पर सिर्फ दो घंटे की अनुमति
Sat, 24 Oct 2026 05:47 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Sat, 24 Oct 2026 05:47 PM IST
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली, छठ, गुरुपर्व, क्रिसमस और नववर्ष के दौरान पटाखे जलाने के लिए समय-सीमा तय की है। दिवाली और गुरुपर्व पर रात 8 से 10 बजे तक, छठ पर सुबह 6 से 8 बजे तक और क्रिसमस व नववर्ष पर रात 11:55 से 12:30 बजे तक आतिशबाजी की अनुमति होगी।
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एनजीटी
- फोटो : संवाद
विस्तार
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धनबाद समेत पूरे राज्य में आगामी त्योहारों के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत प्रदूषण निवारण अधिनियम 1981 की धारा 31(ए) के अंतर्गत यह व्यवस्था लागू की गई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल उन शहरी क्षेत्रों में ही आतिशबाजी की बिक्री की अनुमति होगी जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 1 से 100 के बीच यानी अच्छा या संतोषप्रद श्रेणी में आता है। इसके अलावा, बाजार में केवल उन्हीं पटाखों को बेचने की इजाजत दी जाएगी जिनकी ध्वनि का स्तर 125 डेसिबल से कम होगा।
विभिन्न त्योहारों के लिए समय सीमा तय
बोर्ड ने दिवाली और गुरुपर्व पर केवल रात 8 बजे से 10 बजे तक मात्र दो घंटे आतिशबाजी चलाने की अनुमति दी है। वहीं छठ पूजा के अवसर पर सुबह 6 बजे से 8 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। क्रिसमस और नववर्ष के जश्न के लिए मध्य रात्रि 11:55 बजे से 12:30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। त्योहारों के दौरान वायु तथा ध्वनि की जांच के लिए पर्षद के क्षेत्रीय कार्यालय ने आठ नवंबर को धनबाद के बैंक मोड़, हीरापुर और बरटांड़ में मापक यंत्र लगाने का फैसला किया है। पिछले वर्षों के दौरान समय-सीमा का पालन न होने और देर रात तक आतिशबाजी होने के अनुभवों को देखते हुए इस बार निगरानी बढ़ाई जा रही है।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी ने बताया कि निर्धारित नियमों की अनदेखी करने वालों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 37 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई होगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं रहना चाहिए। सूचकांक का स्तर 201 से 300 के मध्य पहुंचना हवा की खराब श्रेणी दर्शाता है, जो दमा के रोगियों और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है।
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पिछले वर्ष का आंकड़ा और वायु प्रदूषण
धनबाद में बीते वर्ष दिवाली की रात जमकर पटाखे फोड़े गए थे, जिससे हवा में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से काफी ऊपर चला गया था। उस समय पीएम-10 का एयर क्वालिटी इंडेक्स 215 के पार दर्ज किया गया था। जिला प्रशासन द्वारा केवल 54 व्यापारियों को लाइसेंस देने के बावजूद जिले भर में हजारों अनधिकृत दुकानें खुल गई थीं और लगभग 20 करोड़ रुपये के पटाखों की बिक्री हुई थी।
बीते वर्ष बैंक मोड़ क्षेत्र में आतिशबाजी से सर्वाधिक शोर हुआ था। वहां शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक औसत ध्वनि का स्तर 91.21 डेसिबल दर्ज हुआ था, जबकि रात 8 बजे से 10 बजे के बीच यह स्तर 101.4 डेसिबल तक पहुंचा और दिवाली की रात यह 98.2 से 103.4 डेसिबल तक दर्ज किया गया। हीरापुर क्षेत्र में प्री-दिवाली के दौरान अधिकतम औसत ध्वनि स्तर 71.6 डेसिबल था, जो दिवाली की रात बढ़कर 101.4 डेसिबल तक जा पहुंचा।
हीरापुर में रात 10 बजे से 11 बजे के बीच सर्वाधिक शोर हुआ और रात 8 बजे से 11 बजे तक 80 से 100 डेसिबल का स्तर बना रहा। इसी तरह बरटांड़ में भी प्री-दिवाली के दौरान शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक शोर 60.5 से 73.2 डेसिबल था, जो दिवाली की रात बढ़कर 66.7 से 95.3 डेसिबल तक दर्ज किया गया था।
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विभिन्न त्योहारों के लिए समय सीमा तय
बोर्ड ने दिवाली और गुरुपर्व पर केवल रात 8 बजे से 10 बजे तक मात्र दो घंटे आतिशबाजी चलाने की अनुमति दी है। वहीं छठ पूजा के अवसर पर सुबह 6 बजे से 8 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। क्रिसमस और नववर्ष के जश्न के लिए मध्य रात्रि 11:55 बजे से 12:30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। त्योहारों के दौरान वायु तथा ध्वनि की जांच के लिए पर्षद के क्षेत्रीय कार्यालय ने आठ नवंबर को धनबाद के बैंक मोड़, हीरापुर और बरटांड़ में मापक यंत्र लगाने का फैसला किया है। पिछले वर्षों के दौरान समय-सीमा का पालन न होने और देर रात तक आतिशबाजी होने के अनुभवों को देखते हुए इस बार निगरानी बढ़ाई जा रही है।
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नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी ने बताया कि निर्धारित नियमों की अनदेखी करने वालों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 37 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई होगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं रहना चाहिए। सूचकांक का स्तर 201 से 300 के मध्य पहुंचना हवा की खराब श्रेणी दर्शाता है, जो दमा के रोगियों और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है।
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पिछले वर्ष का आंकड़ा और वायु प्रदूषण
धनबाद में बीते वर्ष दिवाली की रात जमकर पटाखे फोड़े गए थे, जिससे हवा में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से काफी ऊपर चला गया था। उस समय पीएम-10 का एयर क्वालिटी इंडेक्स 215 के पार दर्ज किया गया था। जिला प्रशासन द्वारा केवल 54 व्यापारियों को लाइसेंस देने के बावजूद जिले भर में हजारों अनधिकृत दुकानें खुल गई थीं और लगभग 20 करोड़ रुपये के पटाखों की बिक्री हुई थी।
बीते वर्ष बैंक मोड़ क्षेत्र में आतिशबाजी से सर्वाधिक शोर हुआ था। वहां शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक औसत ध्वनि का स्तर 91.21 डेसिबल दर्ज हुआ था, जबकि रात 8 बजे से 10 बजे के बीच यह स्तर 101.4 डेसिबल तक पहुंचा और दिवाली की रात यह 98.2 से 103.4 डेसिबल तक दर्ज किया गया। हीरापुर क्षेत्र में प्री-दिवाली के दौरान अधिकतम औसत ध्वनि स्तर 71.6 डेसिबल था, जो दिवाली की रात बढ़कर 101.4 डेसिबल तक जा पहुंचा।
हीरापुर में रात 10 बजे से 11 बजे के बीच सर्वाधिक शोर हुआ और रात 8 बजे से 11 बजे तक 80 से 100 डेसिबल का स्तर बना रहा। इसी तरह बरटांड़ में भी प्री-दिवाली के दौरान शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक शोर 60.5 से 73.2 डेसिबल था, जो दिवाली की रात बढ़कर 66.7 से 95.3 डेसिबल तक दर्ज किया गया था।