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इस्तीफा देकर कार्रवाई से बचेंगे तो नहीं मिलेगा लाभ: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब, क्या है पूरा मामला?
Thu, 03 Sep 2026 04:53 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 03 Sep 2026 04:53 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने सांविधानिक पदाधिकारियों के इस्तीफे से जुड़े लाभों पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफा देने वालों को रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलने चाहिए। जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला इस याचिका के केंद्र में है। अब सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के जवाब के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि सांविधानिक पद पर बैठे लोग अगर कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफा देते हैं, तो उन्हें रिटायरमेंट से जुड़े लाभ नहीं मिलने चाहिए। इस मांग में जजों समेत सभी सांविधानिक पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल हैं। पीठ ने प्रातिक वीरा की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि अगर कोई सांविधानिक पदाधिकारी अपने खिलाफ हटाने की कार्रवाई या अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए इस्तीफा देता है, तो उसे उस पद से जुड़े लाभ नहीं मिलने चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि पद के कार्यकाल के बीच इस्तीफा देने के बाद भी सुविधाएं मिलते रहना सही नहीं है।
जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला क्यों जुड़ा?
यह याचिका पूर्व हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बाद खास तौर पर अहम हो गई है। जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट तबादला किया गया था। उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में 14 मार्च 2025 को जली हुई करेंसी मिली थी। जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, उनके इस्तीफा देने के बाद यह कार्रवाई निष्प्रभावी हो गई। याचिकाकर्ता ने इसी स्थिति को आधार बनाकर सांविधानिक पदों से जुड़े लाभों पर सवाल उठाया है।
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यह भी पढ़ें: 11 सितंबर को दिल्ली में सरकारी दफ्तर रहेंगे बंद: केंद्र सरकार ने जारी किया छुट्टी का आदेश; क्या है मामला?
याचिका में क्या तर्क दिया गया?
याचिका में कहा गया है कि इस्तीफा देने के बाद भी संवैधानिक पदाधिकारी अपने पद से जुड़ी सुविधाओं और अन्य लाभों के हकदार बने रहते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह कानून के शासन की भावना के खिलाफ है। याचिका में मांग की गई है कि संवैधानिक कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले किसी भी पदाधिकारी को उस पद से जुड़े भत्ते, सुविधाएं और अन्य लाभ नहीं मिलने चाहिए। अब इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
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सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल हैं। पीठ ने प्रातिक वीरा की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि अगर कोई सांविधानिक पदाधिकारी अपने खिलाफ हटाने की कार्रवाई या अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए इस्तीफा देता है, तो उसे उस पद से जुड़े लाभ नहीं मिलने चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि पद के कार्यकाल के बीच इस्तीफा देने के बाद भी सुविधाएं मिलते रहना सही नहीं है।
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जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला क्यों जुड़ा?
यह याचिका पूर्व हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बाद खास तौर पर अहम हो गई है। जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट तबादला किया गया था। उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में 14 मार्च 2025 को जली हुई करेंसी मिली थी। जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, उनके इस्तीफा देने के बाद यह कार्रवाई निष्प्रभावी हो गई। याचिकाकर्ता ने इसी स्थिति को आधार बनाकर सांविधानिक पदों से जुड़े लाभों पर सवाल उठाया है।
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याचिका में क्या तर्क दिया गया?
याचिका में कहा गया है कि इस्तीफा देने के बाद भी संवैधानिक पदाधिकारी अपने पद से जुड़ी सुविधाओं और अन्य लाभों के हकदार बने रहते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह कानून के शासन की भावना के खिलाफ है। याचिका में मांग की गई है कि संवैधानिक कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले किसी भी पदाधिकारी को उस पद से जुड़े भत्ते, सुविधाएं और अन्य लाभ नहीं मिलने चाहिए। अब इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा।