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नेपाल बाढ़: तिमुरे में आखिरी बार दिखा था ब्रिटिश दंपति, नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद से नहीं मिला पता
Fri, 28 Aug 2026 09:34 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 28 Aug 2026 09:34 PM IST
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल पहुंचे भारतीय मूल के ब्रिटिश दंपति अनल कर और संयुक्ता कर 26 अगस्त से लापता हैं। परिवार, ब्रिटिश अधिकारियों और ट्रैवल एजेंसी की ओर से तलाश के बावजूद अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है।
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अनल कर, संयुक्ता कर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर नेपाल गए भारतीय मूल के एक ब्रिटिश दंपति अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पिछले चार दिन से लापता हैं। कोलकाता में रह रहे उनके परिजन उनकी सलामती और किसी भी तरह की जानकारी मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
नाना के पास मौजूद बच्चे परेशान
अनल कर (56) अपनी पत्नी संयुक्ता कर (50) के साथ 18 अगस्त को नई दिल्ली से काठमांडू पहुंचे थे। आखिरी जानकारी के मुताबिक, दोनों नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित तिमुरे में थे। दंपति के बच्चे आरात्रिका कर और शंखदीप अपने माता-पिता से संपर्क नहीं होने के कारण परेशान हैं। दोनों अपने नाना के साथ रहने के लिए कोलकाता रवाना हो गए हैं। उनके नाना कोलकाता के पूर्वी हिस्से में स्थित गरिया में रहते हैं।
आरात्रिका ने कहा, हम गरिया में अपने नाना के यहां रहेंगे और फिर आगे की योजना बनाएंगे। हम नेपाल भी जा सकते हैं। वेल्स के एक अस्पताल में काम करने वाली 24 वर्षीय चिकित्सक आरात्रिका ने फोन पर बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता से पिछले मंगलवार को बात की थी और इसके अगले दिन नेपाल में अचानक बाढ़ आ गई।
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उन्होंने कहा, मैं उनसे संपर्क करने की लगातार कोशिश कर रही हूं, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा। मां से मेरी मंगलवार को बात हुई थी, लेकिन फोन कट गया। इसके बाद उन्होंने मुझे संदेश भेजा था।
आरात्रिका के मुताबिक, उनके माता-पिता एक ट्रैवल एजेंसी की ओर से आयोजित कैलाश मानसरोवर की आठ दिवसीय यात्रा पर गए थे। इस समूह में कुल 31 लोग थे। इनमें एजेंसी के पांच कर्मचारी तथा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और मलेशिया के पर्यटक शामिल थे।
उन्होंने बताया, “वहां पहुंचने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल और ऑनलाइन संचार मंच ‘मैसेंजर’ के जरिये हमसे संपर्क किया था, लेकिन नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण फोन बार-बार कट रहा था। मेरी मां ने मंगलवार को मेरे नाना को संदेश भेजकर बताया था कि वे जांच चौकी (नेपाल-तिब्बत सीमा पर) से 15 किलोमीटर दूर हैं।”
ब्रिटिश अधिकारियों से भी किया संपर्क
आरात्रिका ने अपने माता-पिता का पता लगाने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों ने उन्हें काठमांडू स्थित ब्रिटिश दूतावास से संपर्क करने को कहा। उन्होंने कहा, दूतावास हमें कोई जानकारी नहीं दे सका। केवल इतना बताया गया कि दल स्थिति पर नजर रख रहे हैं और कोई जानकारी मिलने पर हमसे संपर्क किया जाएगा। आरात्रिका ने ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिली।
कोलकाता में परिवार की बढ़ती चिंता
कोलकाता में हर गुजरते दिन के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। बेहाला में रहने वाली अनल कर की बहन झूमा मजूमदार ने कहा कि अनिश्चितता के कारण पूरा परिवार बेहद परेशान है। उन्होंने कहा, चार दिन हो गए हैं और हमें दंपति के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि क्या करूं। मैंने अपने बीमार पिता को इस बारे में कुछ नहीं बताया था, लेकिन उन्हें टेलीविजन पर खबर देखकर इसका पता चल गया। तब से वह बहुत परेशान हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। अनल के रिश्तेदार सैकत सेन ने बताया कि सोशल मीडिया पर की गई उनकी पोस्ट से परिवार को दंपति के आखिरी बार तिमुरे में होने की जानकारी मिली।
सेन ने कहा, उन्होंने 26 अगस्त को सुबह आठ बजकर 10 मिनट पर तस्वीरें अपलोड की थीं। उस समय उनकी ‘लोकेशन’ तिमुरे थी। हम दोनों के फोन नंबर पर लगातार फोन कर रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। हमने यहां नेपाल के वाणिज्य दूतावास से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिल सकी।
ट्रैवल एजेंसी ने कहा- प्रभावित इलाके में पहुंचना संभव नहीं
यात्रा का आयोजन करने वाली काठमांडू स्थित ट्रैवल एजेंसी कैलाश जर्नीज के प्रबंधक सुजय वस्ती ने कहा कि प्रभावित इलाके में आवाजाही प्रतिबंधित होने और रक्षा कर्मियों की ओर से बचाव अभियान चलाए जाने के कारण वे वहां नहीं पहुंच सके हैं। उन्होंने कहा, हमें कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि उनके जीवित बचने की संभावना बहुत कम है। चार दिन हो चुके हैं और मुझे लगता है कि शव बहकर नीचे की ओर भारत में पहुंच चुके होंगे। हम रक्षा और बचाव दलों के संपर्क में हैं।
अधिकारी बोले- दंपति का पता लगाना लगभग असंभव
काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के संयुक्त सचिव एवं मुख्य जिला अधिकारी ईशोर राज पौडेल ने कहा, यहां स्थिति बेहद खराब है। बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आई है, जो हर जगह फैला हुआ है। हमने 450 से अधिक शव बरामद किए हैं। दंपति के जीवित बचने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर पौडेल ने कहा, इसकी संभावना बेहद कम है। दंपति का पता लगाना भी लगभग असंभव है। वे बाढ़ में बह गए होंगे।
हालांकि, कर भाई-बहन को अब भी अपने माता-पिता के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है और हर गुजरते पल के साथ उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं और करीब 400 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं।
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नाना के पास मौजूद बच्चे परेशान
अनल कर (56) अपनी पत्नी संयुक्ता कर (50) के साथ 18 अगस्त को नई दिल्ली से काठमांडू पहुंचे थे। आखिरी जानकारी के मुताबिक, दोनों नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित तिमुरे में थे। दंपति के बच्चे आरात्रिका कर और शंखदीप अपने माता-पिता से संपर्क नहीं होने के कारण परेशान हैं। दोनों अपने नाना के साथ रहने के लिए कोलकाता रवाना हो गए हैं। उनके नाना कोलकाता के पूर्वी हिस्से में स्थित गरिया में रहते हैं।
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आरात्रिका ने कहा, हम गरिया में अपने नाना के यहां रहेंगे और फिर आगे की योजना बनाएंगे। हम नेपाल भी जा सकते हैं। वेल्स के एक अस्पताल में काम करने वाली 24 वर्षीय चिकित्सक आरात्रिका ने फोन पर बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता से पिछले मंगलवार को बात की थी और इसके अगले दिन नेपाल में अचानक बाढ़ आ गई।
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उन्होंने कहा, मैं उनसे संपर्क करने की लगातार कोशिश कर रही हूं, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा। मां से मेरी मंगलवार को बात हुई थी, लेकिन फोन कट गया। इसके बाद उन्होंने मुझे संदेश भेजा था।
आरात्रिका के मुताबिक, उनके माता-पिता एक ट्रैवल एजेंसी की ओर से आयोजित कैलाश मानसरोवर की आठ दिवसीय यात्रा पर गए थे। इस समूह में कुल 31 लोग थे। इनमें एजेंसी के पांच कर्मचारी तथा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और मलेशिया के पर्यटक शामिल थे।
उन्होंने बताया, “वहां पहुंचने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल और ऑनलाइन संचार मंच ‘मैसेंजर’ के जरिये हमसे संपर्क किया था, लेकिन नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण फोन बार-बार कट रहा था। मेरी मां ने मंगलवार को मेरे नाना को संदेश भेजकर बताया था कि वे जांच चौकी (नेपाल-तिब्बत सीमा पर) से 15 किलोमीटर दूर हैं।”
ब्रिटिश अधिकारियों से भी किया संपर्क
आरात्रिका ने अपने माता-पिता का पता लगाने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों ने उन्हें काठमांडू स्थित ब्रिटिश दूतावास से संपर्क करने को कहा। उन्होंने कहा, दूतावास हमें कोई जानकारी नहीं दे सका। केवल इतना बताया गया कि दल स्थिति पर नजर रख रहे हैं और कोई जानकारी मिलने पर हमसे संपर्क किया जाएगा। आरात्रिका ने ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिली।
कोलकाता में परिवार की बढ़ती चिंता
कोलकाता में हर गुजरते दिन के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। बेहाला में रहने वाली अनल कर की बहन झूमा मजूमदार ने कहा कि अनिश्चितता के कारण पूरा परिवार बेहद परेशान है। उन्होंने कहा, चार दिन हो गए हैं और हमें दंपति के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि क्या करूं। मैंने अपने बीमार पिता को इस बारे में कुछ नहीं बताया था, लेकिन उन्हें टेलीविजन पर खबर देखकर इसका पता चल गया। तब से वह बहुत परेशान हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। अनल के रिश्तेदार सैकत सेन ने बताया कि सोशल मीडिया पर की गई उनकी पोस्ट से परिवार को दंपति के आखिरी बार तिमुरे में होने की जानकारी मिली।
सेन ने कहा, उन्होंने 26 अगस्त को सुबह आठ बजकर 10 मिनट पर तस्वीरें अपलोड की थीं। उस समय उनकी ‘लोकेशन’ तिमुरे थी। हम दोनों के फोन नंबर पर लगातार फोन कर रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। हमने यहां नेपाल के वाणिज्य दूतावास से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिल सकी।
ट्रैवल एजेंसी ने कहा- प्रभावित इलाके में पहुंचना संभव नहीं
यात्रा का आयोजन करने वाली काठमांडू स्थित ट्रैवल एजेंसी कैलाश जर्नीज के प्रबंधक सुजय वस्ती ने कहा कि प्रभावित इलाके में आवाजाही प्रतिबंधित होने और रक्षा कर्मियों की ओर से बचाव अभियान चलाए जाने के कारण वे वहां नहीं पहुंच सके हैं। उन्होंने कहा, हमें कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि उनके जीवित बचने की संभावना बहुत कम है। चार दिन हो चुके हैं और मुझे लगता है कि शव बहकर नीचे की ओर भारत में पहुंच चुके होंगे। हम रक्षा और बचाव दलों के संपर्क में हैं।
अधिकारी बोले- दंपति का पता लगाना लगभग असंभव
काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के संयुक्त सचिव एवं मुख्य जिला अधिकारी ईशोर राज पौडेल ने कहा, यहां स्थिति बेहद खराब है। बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आई है, जो हर जगह फैला हुआ है। हमने 450 से अधिक शव बरामद किए हैं। दंपति के जीवित बचने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर पौडेल ने कहा, इसकी संभावना बेहद कम है। दंपति का पता लगाना भी लगभग असंभव है। वे बाढ़ में बह गए होंगे।
हालांकि, कर भाई-बहन को अब भी अपने माता-पिता के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है और हर गुजरते पल के साथ उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही है।विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं और करीब 400 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं।